Wednesday, December 4, 2019

hello Dosto,
आज हम बात करेंगे खुशी की 
                               

ख़ुशी पाने के लिए लोग क्या क्या नई करते है लेकिन इतना करने के बाद भी जब ख़ुशी नई मिलती तोह बड़ा दुःख होता है।  कोई बात नई इतने सारे लोगो की बाते आपने सुनी है आज मेरे भी बातो को जरा पढ़िए और सोच कर विचार कर देखिये मुझे पूरा विश्वास है कि आपको वो ख़ुशी रियल हैप्पीनेस जरूर मिलेगी।  आप सभी का स्वागत है दोस्तों मे रोहित खत्री और आज हम जिस टॉपिक में बात कर रहे है - ख़ुशी 

दोस्तों आप अपने और अपने बीच की ख़ुशी की बाधाओं को, समश्याओ को कैसे आप पार करेंगे कैसे उसका सामना करेंगे इस बारे में हम बात करेंगे।  क्युकि हम सबको लाइफ में बहोत सारी खुशिया चाहिए जीतनी भी मिले उतनी कम है इसीलिए हम ऐसी किताबे या बुक्स , वीडियो और कोर्सेस पर लाखो रूपया खर्च कर देते है जो हमें ये बताते है की खुश कैसे रहना है लेकिन फिर भी हम ज्यादा तर टाइम उदाश ही पाए जाते है हम हर टाइम अपने आप को खुश नहीं कर पाते है तोह आज में आपको कुछ अलग बताने वाला हु कि किस तरह से दिमाग और वातावरण या इन्वॉयरमेन्ट से अंजाने में हमारे खुशियों के स्तर पर कितना ज्यादा इफ़ेक्ट पड़ता है और ये अशर हमेशा पॉजिटिव डायरेक्शन में हो ऐसा भी जरुरी नहीं है तोह आपको ये भी पता चलेगा कि किस तरह से इन फैक्टर्स को  मैनेज करने से हम हमेशा खुश रह सकते है। तोह दोस्तों आज में आप डिस्कवर करेंगे कि क्यों जिम जाने से आपका unhealthy खाना बढ़ सकता है, क्यों फ्रेंच म्यूजिक सुनने से आप वाइन खरीदते है।
और क्यो अपना फ़ोन बंद करने से शुरुआत होती है एक खुशहाल ज़िंदगी की।  वैसे ये लास्ट लाइन पढ़ कर आप चौक गए ना कोई बात नई ऐसी बहोत सारी बाते आपको चौका देंगी तोह पढ़ते राहिये मेरे इस ब्लॉग को क्युकी आप सबसे ज्यादा तब खुश होते है जब आपके रोज़मर्रा का काम अच्छा और पर्पसफुल लगता है मतलब की ये जब आपको आपका कोई पशंदिता कॉमेडी शो पूरी ज़िन्दगी भर देखने क लिए मज़बूर करे तोह क्या आपको खुही होगी आपको ऐसा लगेगा की बिलकुल बेकार है आखिर कार आपको लगने लगेगा इससे अच्छा तोह आप ज़िन्दगी भर काम कर के बिता देते पर ऐसा क्यों है क्युकि मजा आने से खुसी नै मिलती जो आप कर कहे हो अगर उसके पीछे हो तोह आपको ख़ुशी मिलती है ख़ुशी पाने के लिए आपको काम करके मज़ा भी आना चाहिए और उस काम का कोई मतलब भी होना चाहिए।
   आपके रोज़मर्रा के काम प्लेसराबले है या फिर पर्पस फुल हिज जैसे की आपका फेवरेट टीवी शो देखना प्लेसराबले है और अपने काम का कोई प्रेजेंटेशन बनाना परपुसफुल है।  तोह आपके टाइम के सही इस्तेमाल के लिए दोनों ही चीज़ो का सही कॉम्बिनेशन होना जरुरी होना चाहिए मिशाल के तोर पर आपके ऑफिस या प्रोफ़ेशन में काम के बिच में प्लेज़र ब्रेक रखिये जैसे की अच्छा सा लंच करना और कोलिग के साथ अच्छा टाइम बिताना या फिर शाम को एक अच्छा सा वाक लेना आप अपने डाली रुटीन में प्लेज़र चाहते है या पर्पस ये डिपेंड करता है आपकी पर्सनालिटी पर इसके लिए कोई स्टैंडर नहीं है तोह अपने काम और प्लेसर को अपनी शाहूलियत के हिसाब से मिक्स करिये।
 आप शायद प्लेसर मशीन है  आपको मस्ती ज़्यादा पसंद है या आप है पर्पस इंजन जिसे मस्ती से ज्यादा अपना काम प्यारा हो खुसी का मतलब है उस मोमेंट में अच्छा महसूस करना। अपनी हालत में बस संतुस्ट रहने को खुश रहना नहीं कहा जाता है खुश होना एक स्पॉन्टेनियस इमोशन है इसे नाम टोल करके महसूस नहीं किया जा सकता ज्यादा खुसी पाने के लिए आपको प्लेसर और पर्पस दोनों पर ध्यान देना होगा। तोह आगे हम जानेंगे की क्यों इन एक्टिविटीज पर ध्यान देना इतना जरूरी है तोह इसके लिए पढ़ते रहिये amazing fact. 


Tuesday, September 3, 2019

FACTS

AMAZING FACTS 🆒

  1. Dragonflies were around long before the dinosaurs. Back then, they had wingspans  of two and a half feet! 
  2. In a year, million tonnes of dust are transported by the wind from the Sahara Desert to the Amazon!
  3. venetia  venetia burney named Pluto when it was discovered! She was 11 years old!
  4. A group of alligators is called 'congregation'.